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फीडबैक Pedagogy

आप मेरी इस बात से तो सहमत होंगे कि हम शिक्षक जितना समय शिक्षण में व्यतीत करते हैं अमूमन उतना ही समय फीडबैक देने में लगाते हैं I पर कभी –कभी हम दुविधा में भी आ जाते हैं कि फीडबैक देने के बावजूद बच्चों के प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं आ रहाI यह कोर्से हम सभी शिक्षकों की मदद कर सकता है,  जो अपने फीडबैक को अर्थपूर्ण और सार्थक बनाना चाहते हैंI

शिक्षण प्रक्रिया में बच्चों को दिए जाने वाले फीडबैक पर आधारित कोर्से मदद कर सकता है यह जानने में :

  • फीडबैक का सही मायनों में अर्थ 

  • फीडबैक का सीखने – सिखाने की प्रक्रिया पर प्रभाव

  • फीडबैक का विभिन्न कारकों पर प्रभाव 

  • फीडबैक देते हुए हम शिक्षक किन बातों का ध्यान रखें – कब दें , कितना दें ,किस प्रकार दें, दर्शकों अनुसार दें 

  • फीडबैक में क्या कहना, लिखना या करना है – केंद्रबिंदू, तुलना, उद्देश्य और भाव 

चूँकि बच्चों को सही फीडबैक देना शिक्षण प्रक्रिया  का एक अभिन्न अंग है और कहीं न कहीं सीखने – सिखाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है,  इसलिए यह कोर्से किसी भी स्तर पर, किसी भी विषय में शिक्षण कर रहे शिक्षाओं के लिए उपयोगी रहेगाI







कोर्स के लेखक

शिल्पा ठकराल जो कि इस कोर्स की लेखिका हैं , उनका अनुभव स्कूलॊं और विश्वविद्यालय के स्तर पर छात्रों को पढ़ाने का रहा हैं I वह स्कूलॊं में पढ़ा रहे टीचर्स का शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण भी करती हैं I 

 

स्त्रोत

  • Brookhart, S.M. (2008). How to Give Effective Feedback to Your Students.  Association for Alexandria, VA: ASCD

 

  • Burke, D. (2010). Giving Students Effective Written Feedback. England: McGraw-Hill Education 

 

  • Hattie, J., & Timperley, H. (2007). The power of feedback. Review of Educational Research, 77(1), 81–112.

 

  • Hattie, J. A. C. (2009). Visible learning: A synthesis of over 800 meta-analyses relating to achievement. London: Routledge.

 

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